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अथ श्री श्री की कथा !

ये महज़ इत्तेफाक है कि रविशंकर ने ये मुद्दा ऐसे वक्त उठाया जब चुनाव ज़ोर शोर से लड़ा जा रहा है | और इसमें कोई दो राय नहीं कि ये अब चुनावी मुद्दा भी बन जाएगा,जिस तरह से टी वी चैनलों में ये बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है |

अथ श्री श्री की कथा ! November 15, 2017

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By:भूपेंद्र नारायण सिंह 

अपने को श्री श्री कहने वाले रविशंकर आध्यात्मिक विशेषज्ञ ,इवेंट ऑर्गेनाइज़र,अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय शांति पहल में विशेष रूचि रखते है |
हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर जब दिनेश्वर शर्मा केंद्र सरकार द्वारा वार्ताकार नियुक्त हुए (दिनेशवर शर्मा आई बी के डायरेक्टर रह चुके है ),अब कश्मीर मुद्दा हो तो इवेंट क्यों नहीं ! उसी दौरान रविशंकर ने 10 नवंबर को पैगाम -ए -मोहब्बत का एक बड़ा भव्य आयोजन किया | इस मौके पर देश के दो बड़े चैनेलो के मालिक और एडिटर इन चीफ मुख्य वक्ता थे | ये थे आज तक,इंडिया टुडे के मालिक अरुण पूरी जो की खुद रविशंकर के बड़े भक्त कहे जाते है| उन्होंने इस मौके पर रविशंकर को “गुरूजी” कह कर सम्बोधित किया |
इंडिया टी वी के चेयरमैन यानी मालिक रजत शर्मा भी इस मौके पर रविशंकर के तारीफों के पूल बांधे |


इस कार्यक्रम के दो दिन बाद रविशंकर ने बयान दिया कि वो अयोध्या मामले की मध्यस्था करेंगे | इस खबर को इन दोनों चैनेलों ने देश की जनता के सामने खूब दिखाया ,फिर क्या बाकी मीडिया अयोध्या और रविशंकर पर टिक गया |
थोड़ा पीछे चलते है रविशंकर की तरह एक और प्रसिद्ध आध्यात्मिक,योग विशेषज्ञ रामदेव है ,2014 के चुनाव से पहले वो विदेशो में काले धन का मुद्दा उठाने वाले एक ब्रांड अम्बेस्डर बन गए, और पुरे देश में चुनाव के वक्त ये बाद मुद्दा बना | लेकिन अब रामदेव इस मुद्दे पर चुप है |
6 दिसंबर को इस देश में लोग अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने वाला दिन के रूप में याद करते है | और 9 दिसंबर को गुजरात के चुनाव में वोट डाले जाएंगे | ये महज़ इत्तेफाक है कि रविशंकर ने ये मुद्दा ऐसे वक्त उठाया जब चुनाव ज़ोर शोर से लड़ा जा रहा है | और इसमें कोई दो राय नहीं कि ये अब चुनावी मुद्दा भी बन जाएगा |

किसी ने कहा की कि रविशंकर कौन होते है ? तो किसी ने कहा ये अच्छी पहल है ,लेकिन जो इस विवाद में अदालत गए है उन्होंने इस पहल को नाकारा है (वी एच पी और सुन्नी वक्फ बोर्ड ) | कुछ ने रविशंकर को बीजेपी का एजेंट बताया तो किसी ने कहा की ये सिर्फ चुनाव में मुद्दा बनाने की चाल है |
वैसे ये भी बता दे की रविशंकर के लखनऊ में सहयोगी ने साफ तौर पर कहा की मंदिर तो वही बनेगा |

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रविशंकर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की | अगर रविशंकर वाकई मध्यस्थ बनना चाहते है तो उन्हें इस वक्त पंजाब,हरियाणा ,दिल्ली,और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच उस मुद्दे पर मध्यस्था करनी चाहिए जहा लोग सांस लेने में तकलीफ झेल रहे है|और इन सभी मुख्यमंत्रियों के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है |

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