आरूषि मर्डर केस पर आ सकता है फैसला !

9 साल पहले हुई थी आरूषि की हत्या

आरूषि मर्डर केस पर आ सकता है फैसला ! October 12, 2017

आरूषि हत्याकांड किसी मिस्ट्री से कम नहीं…अब इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आ सकता है…यह फैसला गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हत्या के आरोपी तलवार दंपती के भविष्य का फैसला कर सकता है…करीब 9 साल पहले नोएडा के सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार में हुई इस मर्डर मिस्ट्री की पुलिस के बाद सीबीआई की दो टीमों ने जांच की थी…हाईकोर्ट के फैसले से साफ हो जाएगा कि हाई कोर्ट की ओर से किस जांच टीम की थ्युरी  पर मुहर लगेगी….गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी…इससे एक दिन पहले इनको दोषी ठहराया गया था…आरूषि तलवार दंपति की इकलौती संतान थी…विशेष अदालत की सजा के खिलाफ तलवार दंपती ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी…इस पर जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा की खंडपीठ ने तलवार दंपति की अपील पर सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था…. फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्टूबर को तय की थी…मई, 2008 में नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरूषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था…शुरुआत में शक की सुई घर के नौकर हेमराज तरफ घूमी थी, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से उसका भी शव बरामद होने के बाद आरूषि हत्याकांड उलझता ही चला गया…. उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी….

सीबीआई की दो टीमों ने की जांच

नोएडा पुलिस की जांच पर सवाल उठने के बाद इस केस को 31 मई को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया.. जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह की टीम ने डॉ. तलवार के डेंटल क्लिनिक पर काम कर चुके कृष्णा, तलवार के नजदीकी दुर्रानी दंपती के नौकर राजकुमार और पड़ोस में काम करने वाले विजय मंडल को हत्याकांड का आरोपी माना…इसके बाद केस की जांच सितंबर 2009 में सीबीआई की दूसरी टीम ने शुरू की…इस टीम ने तीनों नौकरों को क्लीन चिट दी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर तलवार दंपती को ही मुख्य आरोपी माना… सीबीआई ने दलील दी कि जोर जबरदस्ती किए जाने के कोई सबूत नहीं मिले…

वारदात से सजा तक का सफर
16 मई 2008 की सुबह आरुषि (14) की लाश मिलने के बाद नोएडा पुलिस की ओर से नौकर हेमराज को हत्यारोपी बताया गया, अगले दिन छत पर उसकी लाश बरामद हुई… करीब 7 दिन बाद 23 मई को आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को गिरफ्तार किया गया…31 मई को इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई….सितंबर 2009 में सीबीआई की दूसरी टीम को जांच दी गई… टीम ने तलवार दंपती को आरोपी बताते हुए साक्ष्य न होने पर क्लोजर रिपोर्ट लगाई… कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को ही चार्जशीट में तब्दील कर तलवार दंपती पर केस चलाने के आदेश दिए। 26 नवंबर 2013 को आरुषि के माता-पिता को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी….

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