The Correspondent

जोर का झटका- जोर से ही लगा |

जोर का झटका- जोर से ही लगा | December 18, 2017

न ख़ुदा ही मिला न विसाले सनम | न मुख्यमंत्री की कुर्सी हाथ आयी और न ही विधानसभा में कुर्सी | सुबह सुबह धूमल के घर मुख्यमंत्री वाली सुरक्षा पहुंच गयी ,लेकिन जैसे जैसे हर चरण में वो चुनाव हारते गए उनके सचिवालय वाले लोग खिसकते रहे | हिमाचल राजनीति के इतिहास में उनका नाम इसलिए सर्वोपरि होगा क्योंकि वो पहले राजनेता है जो मुख्यमंत्री के तौर लड़े और बुरी तरह से हारे | बीजेपी की लहर थी,तरंग भी थी ,पर इन लहरों में धूमल की नौका ध्वस्त हो गयी | जब चुनाव थे तो हर जगह नारे लग रहे थे खिलेगा कमल -मुख्यमंत्री बनेगे धूमल ,अब उस पर एक शायरी याद आती है |
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला|
अब ऐसा ही हाल कुछ प्रेम कुमार धूमल की हो गयी है | धूमल के परिवार में ख़ामोशी है ,ख़ामोशी उनके परिवार के भविष्य की राजनीति की है | धूमल की हार के छींटे उनके बेटे और सांसद अनुराग ठाकुर पर भी पड़े है ,क्योंकि अब उनके भविष्य पर प्रश्नचिन्ह है |

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