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नाम में क्या रखा है !

मुगलसराय तो मुगलसराय ही रहेगा ,कही दीन दयाल उपाध्याय नगर दद्दू नगर न बन जाय |

नाम में क्या रखा है ! August 5, 2017

बी जे पी की सरकार ने मुग़लसराय का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय नगर रख दिया है ,चाहे जो नाम बदल ले लेकिन लोगो की जुबां पर मुग़लसराय ही रहेगा ,मैं इसलिए कह रहा हु क्योंकि मुग़लसराय के बगल में बसा बनारस शहर के तीन नाम है, लेकिन आम बोलचाल में अब भी लोग बनारस ही कहते है ,बनारस का पहले नाम था काशी और आज का नाम है वाराणसी ,शहर का नाम बदलने से वहाँ  के रहने वाले लोगो के जनजीवन में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ,आज कोई ये नहीं कहता- वाराणसी पान ,वाराणसी साड़ी ,वाराणसी के घाट ,वाराणसी में गंगा ,लोग कहते है है बनारसी पान,बनारसी साड़ी,बनारस के घाट और बनारस में गंगा | असल में वाराणसी बोलते वक्त आपकी जीभ उसी तरह से लड़खड़ाती है जिस तरह से बेंगलुरु ,वडोदरा ,गुरुग्राम में लड़खड़ाती है | कुछ महीने पहले हरियाणा सरकार ने गुडगाँव का नाम बदल कर गुरुग्राम रखा था ,लेकिन आज भी सबकी जुबां पर गुड़गांव ही है |.
कई सालो से चंडीगढ़ से सटे मोहाली का नाम शहीद अजीत सिंह नगर रखा है ,लेकिन कोइ इस नाम से नहीं पुकारता |
उसी तरह से नवांशहर का नाम शहीद भगत सिंह नगर नाम रखा है ,लेकिन इस नाम से कोई नहीं पुकारता |
इसलिए सरकार भले ही मुगलसराय का नाम बदल दे ,लेकिन वो किसी के जुबां से हटने वाला नहीं है |उसका सबसे बड़ा कारण है कि आज के व्यस्त जीवन में कोई भी इतने बड़े नाम के उच्चारण और सम्बोधन से उसी तरह से बचेगा जैसे की ,शहीद भगत सिंह नगर और शहीद अजीत सिंह नगर से बचता नज़र आ रहा है | हां लोग बाद में इसे दद्दू नगर (दीन दयाल उपाध्याय नगर )ज़रूर कहेगे |

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