शब्द संभारे बोलिए, शब्द के हाथ न पांव |

शब्द संभारे बोलिए, शब्द के हाथ न पांव | November 17, 2017

शब्द संभारे बोलिए, शब्द के हाथ न पांव
एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव|

अमित मालवीय ये वो शख्स है जिसने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर आपत्तिजनक टिप्पड़ी की | मालवीय ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू और उनकी अपनी बहन की कुछ फोटो पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया | मालवीय उस इलाहाबाद से आते है जहाँ की संस्कृति भारत ही नहीं बल्कि विश्व में मशहूर है | मालवीय जहां के रहने वाले है उसी इलाहाबाद की धरती से मदन मोहन मालवीय , गोविन्द बल्लभ पंत,जवाहर लाल नेहरू , लाल बहादुर शास्त्री ,चंद्रशेखर,इंदिरा गाँधी,वी पी सिंह, गुलज़ारी लाल नंदा ,मुरली मनोहर जोशी, रज्जू भैया,हेमंत नंदन बहुगुणा जैसे शरीखे नेता शिक्षा- दीक्षा लेकर राजनीति में आये और उसके स्तर को आगे बढ़ाया |

पर मालवीय सिर्फ IT के बारे में जानते है ,उनके इस आचरण से पता लगता है की वो समाज ,सम्बन्ध ,पद की गरिमा ,सभ्य राजनीति के बारे में अनिभिज्ञ है | उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के बारे में टिप्पड़ी की, जिसे इतिहास भी नहीं मिटा सकता है | मालवीय पर लगाम कसनी ज़रूरी है ,और वो इसलिए की कोई भी व्यक्ति पूर्व प्रधानमंत्रियों का फ़र्ज़ी तरीके से चरित्र हरण न कर सके | मालवीय ने हाल ही में गलत तरीके से एक बड़े पत्रकार रवीश कुमार के वीडियो को काट छांट करके पेश कर बदनाम करने की कोशिश की थी | उससे पहले उन्होंने राम रहीम के साथ राहुल गाँधी की मीटिंग का ज़िक्र सोशल मीडिया पर किया था जो की गलत और फेक न्यूज़ थी | बन्दर के हाथ उस्तरा वाली कहावत तो आपने सुनी होगी ,इस कहावत पर अब बीजेपी को सोचने की ज़रूरत है |

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