शहीद ए आज़म अमर रहें

भगत सिंह की शहादत को सलाम
शहीद की कुर्बानी को शत् शत् नमन

शहीद ए आज़म अमर रहें September 28, 2017

वतन को आजाद करवाने की चाहत में…

वे सुख – दुख सब, अपना भूल गए…

हमे आजाद भारत देने को…

वो हंसते हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए….

कहते है कि शहीद किसी एक कौम का नहीं होता…बल्कि शहीद देश की वो धरोहर होते है जिनकी और से आजादी की जंग के लिए दिए गए योगदान को कोई देशवासी कभी नहीं भुला सकता…हिंदुस्तान की जिस आज़ाद आबो हवा के बीच आज हम सांस ले रहे है…उसे हम तक पहुंचाने के लिए न जाने कितने ही वीरों ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी, कितनी माओं के लाल हंसते हंसते अपने प्राण देश के नाम न्यौछावर कर गए…ताकि हम आज़ादी का सुख ले सके…

 

भगत सिंह जिन्होने हिंदुस्तान को आजाद करवाने के लिए अपना योगदान दिया उस शहीद ए आजम भगत सिंह को कारेसपोंडेंट की टीम के साथ साथ हर देशवासी का सलाम…भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर के जड़ावाला तहसील के तहत पड़ते गांव बंगा के रहने वाले सरदार किशन सिंह की पत्नी माता विद्यावती की कोख से हुआ था…

                 

भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करवाने और हिंदुस्तान को आजाद मुल्क बनाने का सपना भगत सिंह के ज़हन में बचपन से ही पल रहा और वो अपने परिवार के बीच क्रांतिकारी सोच रखने वाले अपने चाचा से भी बेहद प्रभावित थे….देश भक्तों के नक्शे कदम पर चलते हुए भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिल कर अंग्रेजी हकूमत की नाक में दम कर रखा था…लाला लाजपतराय की हत्या के बाद तो भगत सिंह का खून उबल पड़ा और उसने अपनी योजना के तहत अपने साथियों के साथ मिल अंग्रेजी अफसर सांडरस की हत्या को अंजाम दिया था…

इसके अलावा आजादी की जंग में अंजाम दिए गए उनके और क्रांतिकारी कामों को ये देश कभी नहीं भुला सकता…अंग्रेजी हुकूमत की चूले हिला कर रख देने वाले भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया वो भी उनके दो साथी राजगुरू और सुखदेव के साथ….

शहीदों ए आज़म भगत सिंह और शहादत पाए हर शहीद को कारेसपोंडेंट का सलाम…

शहीदों की चिताओं पर लगेगे हर बरस मेले…वतन पे मिटने वालों का बाकी यहीं निशां होगा….

 

 

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