‘सत्यमेव जयते ‘

क्या खत्म हो गया रावण ?
विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

‘सत्यमेव जयते ‘ September 30, 2017

सत्यमेव जयते यानि सत्य की हमेशा जीत होती है…विजय दशमी का त्यौहार इसी बात को और पुख्ता करता है…भगवान राम की रावण जैसे अधर्मी और झूठे अंहकार में फंसे रावण का नाश उसी सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक माना जाता है और रावण के अंत के हर्षोउल्लास में विजयदशमी का त्यौहार मनाया जाता है…बुराई के प्रतीक और राक्षस कुल के विराट योद्दा कुंभकरण और मेघनाथ का पुतला भी रावण के पुतले के साथ पूरे देश में जलता है…इस पावन पर्व की कारेसपोंडेंट की टीम की और से हार्दिक शुभकामनाएं और बधाईयां…

लेकिन सत्यमेव जयते के घोष के साथ इस दिन रावण को फूंकने से क्या रावण खत्म हो गया…हां वो रावण जिसने राम के साथ युद्द किया था वो तो कब का दुनिया से चला गया लेकिन उन रावणों का क्या जो हमारे समाज में बसते है ?

रावण प्रवृति के राम रहीम ने न जाने कितनी ही महिलाओं की अस्मत के साथ खिलवाड़ किया…’ धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का जयघोष लगाने वाले ढ़ोगी बाबा राम रहीम गुरमीत सिंह का सत्य सामने आ चुका है जो जताता है कि बाबा किसी रावण से कम नहीं…

आसाराम सहित उनका बेटा नारायण साईं जेल में अपने कुकर्मों की सजा काट रहे है…धर्म की आड़ में महिलाओं का शोषण करने वाले क्या ये रावण नहीं…जिन्होने ने राम के नाम को व्यापार बना कर रख दिया…और उसी की आड़ में कैसे कैसे गुल खिलाए…ये देश से छिपा नहीं है…

स्वामी नित्यानंद जो महिलाओं के साथ अपनी रासलीलाओं के लिए मशहूर हुए और कानून के हत्थे चढ़े…वो भी किसी रावण से कम नहीं …अपने आप को भगवान तुल्य बताने वाले ये लोग धर्म की आड़ में अधर्म का हर काम करने में माहिर थे और कर रहे थे…

लोगों को अपने मायाजाल में फंसा चांदी कूटने वाली सुखविंद्र कौर उर्फ राधे मां वैसे तो महिला है लेकिन प्रवृति की बात की जाएं तो उनका किरदार भी इस सब लोगों से मिलता जुलता ही है और कर्म भी….अपने आप को मां का अवतार बताने वाली राधे मां किसी रावण से कम नहीं….

रावण प्रवृति के लोग सिर्फ बाबाओं की दुनिया में ही नहीं बल्कि राजनीति में भी होते है…ताजा मामला पंजाब की ही है…सुच्चा सिंह लंगाह अकाली नेता, जिनका नाम ही सिर्फ सुच्चा है बाकी करतूते सुच्चम वाली नहीं…एक महिला ने जनाब पर रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत के साथ वीडियो सौंपी है…क्या ये रावण प्रवृति के लोग नहीं…

नाम या लिस्ट बनाने बैठे तो शायद वक्त कम पड़ जाए…लेकिन नाम खत्म नहीं होगे…तो क्या बस रावण फूंक कर हम हर साल ये मानते रहे कि रावण जल गया…फुंक गया…खत्म हो गया…

लेकिन जरा सोचिए समाज में पलते रावणों को हम कैसे मिटाएंगे…कोई तो बताए इतने राम हम कहां से और कैसे लाएंगे ?

लेकिन जो भी हो इस बात को भी हम नकार नहीं सकते…कि इन लोगों के कुकर्मों का घड़ा जब फूटा तो रावण की तरह अपने आप को सर्वेसर्वा समझने वाले ये कथित बापू और बाबा न सिर्फ अर्श से फर्श पर आ गिरे बल्कि अपने किए की सजा अब सलाखों के बीच भुगत रहे है…जो भी हो अधर्मी की एक दिन हार होती है और अधर्मी का नाश…दशहरा यानि विजयदशमी इसी बात का संदेश देने वाले त्यौहार है…और वैसे भी हर ग्रंथ और वेद के साथ साथ किताबे भी हमे यहीं संदेश देती है कि सत्य की हमेशा जीत होती है यानि सत्यमेव जयते…

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