The Correspondent

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सुप्रीम कोर्ट ने बनाया एक दिन में सबसे ज्यादा मामले निपटाने का रिकॉर्ड

सुप्रीम कोर्ट ने बनाया एक दिन में सबसे ज्यादा मामले निपटाने का रिकॉर्ड June 6, 2017

नई दिल्ली: (अनुपम) सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक जज वाली एक बेंच ने 33 मामलों की सुनवाई की और उनका निपटारा किया. दरअसल, वरिष्ठ जज की गैर-मौजूदगी में जस्टिस दीपक गुप्ता ने अकेले ही कोर्ट की कार्यवाही शुरू की और कुल 33 मामले निपटाए. इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं. सुप्रीम कोर्ट में एक दिन में इतने सारे मामलों का निपटारा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है.
उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट के एक सिपल जज ने इसी वर्ष अप्रैल महीने में 327 वर्किंग डेज में 6065 केसों पर फैसला सुनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. जज तेजबहादुर सिंह का कहना है कि ऐसा करने के पीछे उनका मकसद कोर्ट में पेंडिंग पड़े ढेरों केसों का निपटारा करना और लोगों को इंसाफ देना था.
– जज तेजबहादुर सिंह ने मीडिया से कहा कि उन्होंने यह रिकॉर्ड उस वक्त बनाया, जब जिले में वकीलों की हड़ताल चल रही थी.
– उन्होंने कहा कि देश में यह अब तक का सबसे ज्यादा केसाें का निपटारा है.
– सिंह ने कहा कि उनके दिए गए फैसलों में 903 कपल्स के बीच सुलह कराई गई.
गिनीज ने की पुष्टि
– गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से भी उनकी लिस्ट में सिंह का नाम शामिल किए जाने की पुष्टि कर दी गई है.
भारत में 3 करोड़ केस पेंडिंग
– भारत की अदालतों में 3 करोड़ केस पेंडिंग हैं. निचली अदालतों में 5 हजार जजों की कमी है. सुप्रीम कोर्ट की जनवरी में जारी की गईं दो रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था.
– ये रिपोर्ट “इंडियन ज्यूडिशियरी एनुअल रिपोर्ट 2015-16′ और ‘सबॉर्डिनेट कोर्ट्स ऑफ इंडिया: ए रिपोर्ट ऑन एक्सेस टू जस्टिस 2016:” के नाम से जारी की गई थीं.
– इसके आधार पर देश में 3 साल के अंदर 15 हजार जजों के अप्वाॅइंटमेंट की जरूरत बताई गई थी.
जिला कोर्ट में 2 करोड़ 81 लाख पेंडिंग केस
– रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई 2015-30 जून 2016 के बीच जिला कोर्ट्स में 2 करोड़ 81 लाख 25 हजार 66 सिविल और क्रिमिनल केस पेंडिंग थे.
– हालांकि, इसी दौरान एक करोड़ 89 लाख 4 हजार 222 मामले निपटाए भी गए.
– रिपोर्ट्स बताती हैं, 4 हजार 954 जजों की पोस्ट खाली हैं. जबकि निचली अदालतों में 21 हजार 324 ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की पोस्ट सेंक्शन हैं.
– रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जजों की मौजूदा संख्या बड़ी तादाद में केसों का निपटारा करने में नाकाफी है. इसके चलते पेंडिंग मामले बढ़ते जा रहे हैं जो चिंता का विषय है.
– “इसके लिए जरूरी होगा कि जजों के अलावा सपोर्ट स्टाफ बढ़ाया जाए और इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर किया जाए.”
– “जजों की मौजूदा स्ट्रेन्थ केवल नए केसों का निपटाने करने में सक्षम है. ये ऐसे केस हैं जो हर साल फाइल हो रहे हैं.”
– “लिहाजा ये जरूरी है कि आने वाले समय में केस दायर करने के पैटर्न और पेंडिंग केसों को निपटारे के तरीकों में बदलाव लाया जाए.”
13% केसों का हो पाता है ट्रायल
– नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की मानें तो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स एक साल में महज 13 फीसदी मामलों की सुनवाई कर पाते हैं.
– इस लिहाज से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की स्ट्रेन्थ को 7 गुना तक बढ़ाए जाने की जरूरत है ताकि एक साल में केसों की सुनवाई तो पूरी की जा सके.
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स की हालत ज्यादा खराब
– रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के जिला कोर्ट्स की हालत ज्यादा खराब है.
– गुजरात में 794, बिहार में 792 और उत्तर प्रदेश में 624 जजों की कमी है.
– गुजरात में निचली अदालतों में 1953, बिहार में 1825 और उत्तर प्रदेश में 2394 जजों की पोस्ट्स सेंक्शन हैं. इसके उलट गुजरात के लोअर कोर्ट्स में 1159, बिहार में1033 और यूपी में 1770 जज हैं.
– दिल्ली में भी जजों की 793 पोस्ट्स सेंक्शन हैं जबकि 486 जज काम कर रहे हैं. 307 पोस्ट्स खाली हैं.
– रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में 58.8 लाख पेंडिंग केस हैं जिनमें 43.73 लाख क्रिमिनल केस हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने बनाया एक दिन में सबसे ज्यादा मामले निपटाने का रिकॉर्ड—-
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक जज वाली एक बेंच ने 33 मामलों की सुनवाई की और उनका निपटारा किया. दरअसल, वरिष्ठ जज की गैर-मौजूदगी में जस्टिस दीपक गुप्ता ने अकेले ही कोर्ट की कार्यवाही शुरू की और कुल 33 मामले निपटाए. इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं. सुप्रीम कोर्ट में एक दिन में इतने सारे मामलों का निपटारा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है.
उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट के एक सिपल जज ने इसी वर्ष अप्रैल महीने में 327 वर्किंग डेज में 6065 केसों पर फैसला सुनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. जज तेजबहादुर सिंह का कहना है कि ऐसा करने के पीछे उनका मकसद कोर्ट में पेंडिंग पड़े ढेरों केसों का निपटारा करना और लोगों को इंसाफ देना था.
– जज तेजबहादुर सिंह ने मीडिया से कहा कि उन्होंने यह रिकॉर्ड उस वक्त बनाया, जब जिले में वकीलों की हड़ताल चल रही थी.
– उन्होंने कहा कि देश में यह अब तक का सबसे ज्यादा केसाें का निपटारा है.
– सिंह ने कहा कि उनके दिए गए फैसलों में 903 कपल्स के बीच सुलह कराई गई.
गिनीज ने की पुष्टि
– गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से भी उनकी लिस्ट में सिंह का नाम शामिल किए जाने की पुष्टि कर दी गई है.
भारत में 3 करोड़ केस पेंडिंग
– भारत की अदालतों में 3 करोड़ केस पेंडिंग हैं. निचली अदालतों में 5 हजार जजों की कमी है. सुप्रीम कोर्ट की जनवरी में जारी की गईं दो रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था.
– ये रिपोर्ट “इंडियन ज्यूडिशियरी एनुअल रिपोर्ट 2015-16’ और ‘सबॉर्डिनेट कोर्ट्स ऑफ इंडिया: ए रिपोर्ट ऑन एक्सेस टू जस्टिस 2016:” के नाम से जारी की गई थीं.
– इसके आधार पर देश में 3 साल के अंदर 15 हजार जजों के अप्वाॅइंटमेंट की जरूरत बताई गई थी.
जिला कोर्ट में 2 करोड़ 81 लाख पेंडिंग केस
– रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई 2015-30 जून 2016 के बीच जिला कोर्ट्स में 2 करोड़ 81 लाख 25 हजार 66 सिविल और क्रिमिनल केस पेंडिंग थे.
– हालांकि, इसी दौरान एक करोड़ 89 लाख 4 हजार 222 मामले निपटाए भी गए.
– रिपोर्ट्स बताती हैं, 4 हजार 954 जजों की पोस्ट खाली हैं. जबकि निचली अदालतों में 21 हजार 324 ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की पोस्ट सेंक्शन हैं.
– रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जजों की मौजूदा संख्या बड़ी तादाद में केसों का निपटारा करने में नाकाफी है. इसके चलते पेंडिंग मामले बढ़ते जा रहे हैं जो चिंता का विषय है.
– “इसके लिए जरूरी होगा कि जजों के अलावा सपोर्ट स्टाफ बढ़ाया जाए और इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर किया जाए.”
– “जजों की मौजूदा स्ट्रेन्थ केवल नए केसों का निपटाने करने में सक्षम है. ये ऐसे केस हैं जो हर साल फाइल हो रहे हैं.”
– “लिहाजा ये जरूरी है कि आने वाले समय में केस दायर करने के पैटर्न और पेंडिंग केसों को निपटारे के तरीकों में बदलाव लाया जाए.”
13% केसों का हो पाता है ट्रायल
– नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की मानें तो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स एक साल में महज 13 फीसदी मामलों की सुनवाई कर पाते हैं.
– इस लिहाज से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की स्ट्रेन्थ को 7 गुना तक बढ़ाए जाने की जरूरत है ताकि एक साल में केसों की सुनवाई तो पूरी की जा सके.
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स की हालत ज्यादा खराब
– रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के जिला कोर्ट्स की हालत ज्यादा खराब है.
– गुजरात में 794, बिहार में 792 और उत्तर प्रदेश में 624 जजों की कमी है.
– गुजरात में निचली अदालतों में 1953, बिहार में 1825 और उत्तर प्रदेश में 2394 जजों की पोस्ट्स सेंक्शन हैं. इसके उलट गुजरात के लोअर कोर्ट्स में 1159, बिहार में1033 और यूपी में 1770 जज हैं.
– दिल्ली में भी जजों की 793 पोस्ट्स सेंक्शन हैं जबकि 486 जज काम कर रहे हैं. 307 पोस्ट्स खाली हैं.
– रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में 58.8 लाख पेंडिंग केस हैं जिनमें 43.73 लाख क्रिमिनल केस हैं.

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